बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा: हिंदुओं के बाद बौद्ध समुदाय क्यों निशाने पर?
बांग्लादेश में हाल के वर्षों में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ...
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आस्था, समय और परंपरा का पवित्र संगम
सिंहस्थ कुंभ उज्जैन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।यहां शिप्रा नदी में अमृत योग के दौरान स्नान करना मोक्ष की प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला यह पर्व भारत की सबसे पवित्र धार्मिक परंपराओं में से एक है।
आस्था, समय और परंपरा का पवित्र संगम
सिंहस्थ कुंभ उज्जैन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।यहां शिप्रा नदी में अमृत योग के दौरान स्नान करना मोक्ष की प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला यह पर्व भारत की सबसे पवित्र धार्मिक परंपराओं में से एक है।
आस्था, समय और परंपरा का पवित्र संगम
सिंहस्थ कुंभ उज्जैन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।यहां शिप्रा नदी में अमृत योग के दौरान स्नान करना मोक्ष की प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला यह पर्व भारत की सबसे पवित्र धार्मिक परंपराओं में से एक है।
महाकाल, हरसिद्धि और अन्य प्रमुख मंदिरों में
विशेष पूजा, अभिषेक और रुद्राभिषेक की सम्पूर्ण जानकारी और पंडित संपर्क।
भस्म आरती समय, दर्शन नियम, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और VIP दर्शन से जुड़ी पूरी गाइड
किस मंदिर में कब जाएं, कहाँ लाइन कम रहती है और किस समय दर्शन सबसे सरल होते हैं – सब एक जगह।
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सिंहस्थ के समय उज्जैन में सबसे बड़ी इच्छा होती है महाकाल के दर्शन। लेकिन जो लोग बिना जानकारी आते हैं,
सिंहस्थ उज्जैन 2028 में अनुमान है कि हर दिन 30 से 40 लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुँचेंगे। बिना प्लानिंग आए लोगों को घंटों लाइन,
सिंहस्थ कुंभ उज्जैन भारत के सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर 12 वर्षों में आयोजित होने वाले इस महापर्व में करोड़ों श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान कर मोक्ष
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ज्यादातर प्रसिद्ध मंदिरों में अब दर्शन के लिए ऑनलाइन या ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होती है। यात्रा से पहले आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय प्रशासन की जानकारी जरूर देख लें।
अधिकतर मंदिरों में सुरक्षा कारणों से मोबाइल, बैग, बेल्ट और अन्य सामान अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होती। बाहर बने लॉकर काउंटर पर इन्हें जमा करना पड़ता है।
कई मंदिरों में बुजुर्गों, दिव्यांगों और छोटे बच्चों के लिए अलग लाइन या विशेष सहायता काउंटर की सुविधा दी जाती है। भीड़ के समय सुबह या देर रात दर्शन करना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
VIP दर्शन की व्यवस्था मंदिर प्रशासन द्वारा तय की जाती है। इसके लिए अलग काउंटर या ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम हो सकता है, लेकिन त्योहार और भीड़ के समय सामान्य दर्शन भी उतना ही प्रभावी रहता है।
सुबह जल्दी या देर शाम का समय सबसे शांत माना जाता है। दोपहर और शाम के समय भीड़ काफी अधिक होती है।
हल्का सामान रखें, पर्याप्त पानी पिएं, प्रशासन द्वारा तय रूट का पालन करें और मेडिकल सहायता केंद्र की जानकारी पहले से रखें।
तुरंत नजदीकी पुलिस या सहायता काउंटर पर संपर्क करें और दिए गए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल करें।
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हिंदू धर्म जीवन, कर्म और आत्मा के संतुलन की शिक्षा देता है। यह धर्म साधना, सत्य और आत्मिक विकास के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

इस्लाम धर्म शांति, करुणा और भाईचारे का संदेश देता है। यह अनुशासन, ईमानदारी और मानवता की सेवा पर आधारित है।

सिख धर्म सेवा, समानता और साहस की भावना सिखाता है। यह निस्वार्थ सेवा और मानव कल्याण को जीवन का मूल उद्देश्य मानता है।

ईसाई धर्म प्रेम, क्षमा और करुणा का मार्ग दिखाता है। यह मानव सेवा और आपसी सहयोग को सबसे बड़ा धर्म मानता है।

बौद्ध धर्म शांति, ध्यान और अहिंसा पर आधारित है। यह दुख से मुक्ति और आत्मबोध का मार्ग सिखाता है।

जैन धर्म अहिंसा, संयम और सत्य के सिद्धांतों पर आधारित है। यह आत्मशुद्धि और नैतिक जीवन को सर्वोच्च मानता है।