उज्जैन सिंहस्थ कुंभ (मध्य प्रदेश): कब होता है, कैसे होता है और इसका आध्यात्मिक महत्व

उज्जैन में आयोजित होने वाला कुंभ मेला सिंहस्थ कहलाता है। यह भारत के चार प्रमुख कुंभ मेलों में एक है और इसका आयोजन भगवान महाकाल की पावन नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर होता है। सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काल, मृत्यु और आत्मा से जुड़े गहन आध्यात्मिक चिंतन का पर्व माना जाता है।

उज्जैन को सनातन परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है, क्योंकि यह समय गणना, ज्योतिष और शिव साधना का प्रमुख केंद्र रहा है। इसी कारण यहाँ होने वाला कुंभ भी अन्य कुंभों से अलग पहचान रखता है।


सिंहस्थ कुंभ क्या है

सिंहस्थ कुंभ, कुंभ मेले का वही स्वरूप है जो उज्जैन में आयोजित होता है। इसे सिंहस्थ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका समय गुरु (बृहस्पति) ग्रह के सिंह राशि में प्रवेश से निर्धारित होता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश की एक बूंद उज्जैन में गिरी थी। इसी कारण शिप्रा नदी के तट पर सिंहस्थ कुंभ की परंपरा शुरू हुई।


उज्जैन सिंहस्थ कुंभ कब होता है

उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ तब आयोजित होता है जब
बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करता है।

यह विशेष ज्योतिषीय योग लगभग हर 12 वर्ष में बनता है। इसी आधार पर उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता है।


उज्जैन सिंहस्थ कुंभ कैसे होता है

सिंहस्थ कुंभ का केंद्र शिप्रा नदी में पवित्र स्नान है। कुंभ के दौरान उज्जैन शहर एक विशाल धार्मिक नगर में परिवर्तित हो जाता है।

सिंहस्थ के प्रमुख आयोजन इस प्रकार होते हैं

  • शिप्रा नदी में पर्व स्नान
  • अखाड़ों का शाही स्नान
  • साधु-संतों की पेशवाई
  • महाकाल मंदिर में विशेष दर्शन
  • धार्मिक प्रवचन, यज्ञ और अनुष्ठान

पूरे सिंहस्थ काल में उज्जैन में अस्थायी मेला क्षेत्र, साधु शिविर, अखाड़ा क्षेत्र और श्रद्धालुओं के लिए विशाल व्यवस्थाएं की जाती हैं।


शिप्रा स्नान और शाही स्नान का महत्व

सिंहस्थ कुंभ में शिप्रा नदी स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि सिंहस्थ काल में शिप्रा के जल में अमृत तत्व सक्रिय हो जाता है।

शाही स्नान सिंहस्थ का सबसे पवित्र और अनुशासित आयोजन माना जाता है, जिसमें अखाड़ों के साधु-संत पारंपरिक विधि से स्नान करते हैं। इसके बाद सामान्य श्रद्धालुओं को स्नान का अवसर मिलता है।


महाकाल और सिंहस्थ का गहरा संबंध

उज्जैन भगवान महाकाल की नगरी है। सिंहस्थ कुंभ का महत्व केवल नदी स्नान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महाकाल दर्शन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

मान्यता है कि सिंहस्थ के दौरान महाकाल दर्शन करने से

  • काल और मृत्यु का भय समाप्त होता है
  • आत्मा को शांति मिलती है
  • जीवन में आध्यात्मिक स्थिरता आती है

इसी कारण सिंहस्थ कुंभ को शिव तत्व से जुड़ने का महापर्व माना जाता है।


उज्जैन सिंहस्थ की धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार उज्जैन सिंहस्थ में

  • शिप्रा स्नान करने से पापों का नाश होता है
  • आत्मा शुद्ध होती है
  • समय और मृत्यु के बंधन से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है

सिंहस्थ को आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का पर्व माना जाता है।


आख़िरी बार उज्जैन सिंहस्थ कब हुआ

उज्जैन में
2016 में सिंहस्थ कुंभ आयोजित हुआ था। इस आयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया था और यह एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन के रूप में दर्ज हुआ।


अगला उज्जैन सिंहस्थ कुंभ कब होगा

उज्जैन में
2028 में अगला सिंहस्थ कुंभ आयोजित होगा। इसे लेकर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। अनुमान है कि इस सिंहस्थ में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे।


निष्कर्ष

उज्जैन सिंहस्थ कुंभ केवल एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि काल से परे जाने की साधना है। यह ऐसा अवसर है जहाँ श्रद्धालु शिप्रा के तट पर स्नान कर महाकाल की शरण में अपने जीवन को नया अर्थ देते हैं।

सिंहस्थ उज्जैन सनातन संस्कृति का वह पर्व है, जहाँ आस्था, ज्योतिष और अध्यात्म एक साथ जीवंत हो उठते हैं।

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