प्रेमानंद महाराज का संदेश: केवल मंदिर जाना नहीं, विचारों की शुद्धता भी आवश्यक आज के समय में जब धर्म और आस्था को अक्सर केवल बाहरी कर्मकांड तक सीमित कर दिया गया है,